Monday, September 23, 2013

महानतम फिल्म ‘ग्रैंड मस्ती’ की सुलोचनात्मक समीक्षा

(अपने इस ब्लॉग पे अब तक कई समीक्षा मैंने लिखी हैं..क्योंकि ये मेरा पसंदीदा शगल है। लेकिन ग्रैंड मस्ती की समीक्षा करने का कतई मन नहीं था क्योंकि इसे मैं समीक्षा किये जाने के काबिल ही नहीं मान रहा था..फिर भी कुछ चीज़ें हैं जो मुझे कुछ कहने से नहीं रोक पा रही बस इसलिये मैं इस ब्लॉग पर इस बेबुनियाद, पतित, विध्वंसक, फूहड़ सी फिल्म पे एक पोस्ट आपके सामने पेश कर रहा हूँ...हाल ही में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म "ग्रैंड मस्ती" का मैंने महज ट्रेलर देखा था और उस ट्रैलर से ही फिल्म की प्रकृति को भलीभांति समझा जा सकता है..ट्रैलर देखने के दौरान ही इसे न देखने का मेरा निर्णय था क्योंकि इस तरह की वाहियात फिल्मों का मैं धुर विरोधी हूँ..सार्थकता के प्रति मेरा तीव्र आग्रह है और सार्थक मनोरंजन का ही हिमायती हूँ..चैन्नई एक्सप्रेस यकीनन एक छद्म मनोरंजक फिल्म थी पर वाहियात नहीं थी..उस फिल्म की कमाई के आंकड़ो को देख, पहले ही मन व्यथित था और कुछ बची कसर को पूरा करने के लिये 'ग्रैंड मस्ती' के व्यवसायिक आंकड़े देखने की और देर थी...ऐसी फिल्मों का भारतीय जनमानस द्वारा पसंद किया जाना और दर्शकों के मनोरंजन व हास्य का ये पैमाना, गहन मंथन को मजबूर करता है..और वर्तमान की युवा पीढ़ी की इस पसंद में समाज के भविष्य का प्रतिबिम्ब बखूब नज़र आता है...हमें सोचना होगा कि हम आखिर किस चीज़ पे हँस रहे हैं, हमारे मनोरंजन की हर एक वजह पे मंथन ज़रूरी है।


 समाज का एक अहम् हिस्सा और इस प्रकृति में मानव की अर्धांगिनी का दर्जा रखने वाली नारी के प्रति दिखाये जाने वाले इस छद्म प्रस्तुतिकरण पर हमारे हाथों से बजने वाली तालियाँ तथा हमारी जेबों से निकल बॉक्स ऑफिस पे खर्च होने वाले रुपये..हमारी मानवता और नैतिकता का आखिर कैसा चरित्र प्रस्तुत करता है ये विचारना होगा...खैर मैंने ये फिल्म वाकई में नहीं देखी है पर लोगों और अखबारों से इसकी लोकप्रियता की झलकियाँ लगातार मिल रही हैं..सोशल नेटवर्किंग के इस संजाल पे एक बेहतरीन व्यंग्य इस फिल्म पे मिला है..इसे पढ़कर सिर्फ हंसियेगा नहीं बल्कि कुछ विचारिगा भी- प्रस्तुत है ग्रैंड मस्ती की सुलोचनात्मक समीक्षा- )


ग्रैंड मस्ती’ देखकर आज दिल भर आया! इस अनूठे
मील के पत्थर की अनुशंसा में देह के हर प्रकार के
भाव कुत्तों सी मुद्रा में फफक- फफक कर रो रहे हैं!
इस फिल्म से समस्त नारी जाति का जो सम्मान
बढ़ा है वो फिल्म इतिहास में हमेशा स्मरण
किया जाएगान केवल इस फिल्म में नारी के
भावों और आहों का हर एक कोण से
गरिमामयी चित्रण किया है बल्कि उसके अंग-प्रत्यंग
की भंगिमाओं का बड़े आध्यात्मिक तरीके से
प्रस्तुतिकरण किया गया है! नारी सशक्तिकरण और
नारी की स्वतंत्रता व उत्थान की दिशा में
क्रन्तिकारी कदम है!
एक और अनुकरणीय कदम शिक्षा के क्षेत्र में
भी देखने को मिलाइस महाचलचित्र में चालचलन व
चरित्र के अनूठे मोती पिरोये गए हैं जो कि यौन-
शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करने के
सभी गुण रखता है! ABCD के नए नए
अर्थों को प्रस्तुत करके प्राथमिक स्तर पर बाल-
शिक्षा के प्रोत्साहन के लिए भी इसमें अथाह बल
प्रदान किया है!
कौन कहता है कि हमारे छात्र टाट पर बैठ टीन
की छत वाले विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करते हैं!
फिल्म के कॉलेज को बकिंघम पैलेस से भी श्रेष्ठ और
खूबसूरत दिखाकर निर्माता ने विश्व भर में
भारतीयों की शान को बढाया है और कॉलेज के प्रांगण
में कन्याओं को अधोवस्त्र पहनकर अध्ययन करने
आये हुए दिखाकर उसने ऐसे
फिसड्डी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने
के लिए लालायित करने का सफल प्रयास किया है
जो कंप्यूटर के सामने ही ऐसे महान
क्रिया कलापों की अग्न में मग्न रहते थे!
चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान देने के लिए भी यह
फिल्म भूरि-भूरि प्रशंसा के काबिल है! पूर्ण विश्वास
है कि जिन बुजुर्गों की रक्त धमनियों में रक्त जम
गया हो तो इस प्रेरणादायक चलचित्र को दिन में तीन
बार देखने पर वे हर प्रकार से चलायमान होंगे और
उनके जीवन में नव संचार होगानया सूर्य उदय
होगाआयु-वृधि होगी!
इति श्री ग्रैंड मस्तियाय !! समस्त ठरकी-गण
को समर्पिताय !!

23 comments:

  1. Replies
    1. किस्मत अच्छी थी आपकी...

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  2. हैरान था ...ये सोच कर कि आप जैसा नवयुवक
    ऐसी फिल्म पर भी समीक्षा लिखने की सोच सकता है ...
    येही सोच कर पढने भी चला आया..पर चैन की साँस ली
    कि मेरी सोच आप के बारे में गलत नही थी...बाकि तो इस
    पर बहस ही बेकार है ....जब ऐसा समाज होगा और ऐसा मनोरंजन
    परोसा जायेगा और उसमें से भी पैसा बरसेगा तो ...एक अबला नारी की
    अस्मत लुटने पर सिर्फ दिखावा ही होगा न ..?????

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    1. धन्यवाद अशोकजी..

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  3. बहुत सटीक…… सुन्दर समीक्षा .....

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  4. वाह...क्या धारदार समीक्षा है......काश फिल्म निर्माता और वो महान actors भी पढ़ पाते कि आखिर समीक्षक और दर्शक उनकी फिल्म के विषय में कैसे विचार रखते हैं.....
    मुझे तो ये तीन तीन हीरो वाली कोई भी फिल्म आज तक रास नहीं आयी....(अमर अकबर अन्थोनी को छोड़ कर...)
    good job ankur
    अनु

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    1. शुक्रिया..शुक्रिया अनुजी..और एक दम सही फरमाया आपने मल्टीस्टारकास्ट वाली फिल्मों में अक्सर निर्देशक बहुत सारा रायता फैला देता है जिसे दर्शकों को झेलना पड़ता है।।।

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  5. वाकई फिल्म के प्रीव्यू देखकर ही उबकाइयां आने लगती हैं. जिन्होंने फिल्म देखने की हिम्मत की जाने किस तरह के लोग हैं.

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    1. शिखाजी कुछ तथाकथित मनोरंजन प्रेमी लोगों का हाजमा कुछ ज्यादा ही दुरुस्त है अतः उन्हें उबकाइयां नहीं आती..धन्यवाद आपकी समीक्षा हेतु।।।

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  6. बॉस ये िल्‍में नहीं बल्कि समाज का आईना हैं कि समाज किधर जा रहा है क्‍या कर रहा है। बिना सख्‍त कदम उठाए ये समाज नहीं सुधरनेवाला। मैं तो खैर िल्‍में देखता नहीं। आप लोगों से ही इनके बारे में सुनता हूँ। पर परिवेश के मानुषिक हाव-भावों से मुझे मनुष्‍यों द्वारा देखीजानेवाली िल्‍मों के बारे में मालूम हो जाता है। बड़ी अजीब जद्दोजहद उत्‍पन्‍न कर दी है ऐसी सोच ने। हमारे प्रधानमन्‍त्री राष्‍ट्रीय एकता परिषद् की हाल ही में सम्‍पन्‍न हुई बैठक में हिंसा और स्‍त्री सुरक्षा पर लोगों का आहवान करते हुए 'शर्म' करने की बात करते हैं। मैं पूछता हूँ वो किससे शर्माने को कह रहे हैं। संचालन तो दशकों से आपकी पार्टी और पिछले नौ सालों से आपके हाथ में है। आप क्‍या कर रहे हैं। इन लोगों ने यूरोपीय कल्‍चर परोसने के चक्‍कर में देश की हालत दयनीय कर दी है।

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    1. एकदम सही फरमाया विकेश जी..धन्यवाद आपके इन वहुमूल्य उद्गारों के लिए।।।

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  7. अच्छा हुआ कि नहीं गये और न जायेंगे।

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    1. खुशनसीब हैं आप :)

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  8. इस फिल्म के सन्दर्भ में एक बात कहना चाहूंगी, 'स्टार न्यूज़' पर रोज़ इस फिल्म के लिए बहुत ज़ोरदार तरीके से कहा जा रहा है 'ग्रैंड मस्ती' का collection ....... करोड़ तक पहुँचा। शायद ऐसे ही सौ करोड़ का कारोबार हो जाये, जो की दुर्भाग्यपूर्ण ही होगा।

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  9. तीखी समीक्षा .. अच्छा हुआ फिल्म नहीं देखि अभी तक ...

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    1. जी धन्यवाद...और बधाई फिल्म न देखने के लिये :)

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  10. Dude bro.,

    you are awesome....love you very much bro.

    first time visited your blog....find it very interesting :)

    wish you a gud luck from bottom of ma heart.

    over da time i am seeing you really made it large...you may reach HIGHER

    Regards,

    Nitin jain

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