Monday, July 1, 2013

साक्षात्कार : डॉ. एन.पी. मिश्रा



आज डॉक्टर्स डे है...हमारी जिंदगी को स्वस्थ और मस्त बनाये रखने में इनका एक अहम् रोल है। आज के इस दिन के उपलक्ष्य में डॉक्टर्स की लाइफ के कुछ अनछुए पहलू जानने के लिये, मैंने डॉ. एन.पी.मिश्रा से बात की। चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. एन.पी. मिश्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान करते उन्होंने छः दशक का लंबा सफर तय किया है और आज भी वे इसी जीवटता के साथ अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। अपने सामने उन्होंने डॉक्टर्स की लगभग तीन पीढ़ी तैयार होते देखी हैं इसी वजह से भोपाल शहर में उन्हें डॉक्टर्स के पितामह के रूप में जाना जाता है। डॉक्टर्स डे के इस अवसर पर इस विलक्षण हस्ती से, उनके करियर और चिकित्सा क्षेत्र के संबंध में खास बातचीत की...प्रस्तुत हैं इस वार्ता के खास अंश-


प्रश्न- आप अपने इस सफलतम लंबे करियर का श्रेय किसे देते हैं?
उत्तर-  लगन एवं कड़ी मेहनत, साथ ही अपने ध्येय के प्रति वफादारी और रोगी के प्रति सच्ची निष्ठा..यही वे चीजें हैं जिस कारण आज इस मुकाम तक पहुंच पाया हूँ। इसके अलावा इस व्यवसाय को चलाने के लिये परिवार का सहयोग भी अत्यंत आवश्यक है। परिवार में अगर आपसी समझ नहीं होगी तो हमारे व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ व्यवसायिक जीवन भी सही ढंग से नहीं चल सकता।

प्रश्न- अपने इस करियर के दौरान कब आपने सर्वाधिक चुनौती का अनुभव किया?
उत्तर- 3 दिसंबर 1984। भोपाल गैसकांड की वो काली रात जब मरीजों को एकसाथ संभालना और उन्हें समय पर सही ट्रीटमेंट पहुंचाना ज़रूरी था। उस दौरान में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में डीन हुआ करता था। उस रात का स्मरण करके मुझे आज भी विस्मय होता है कि हमने चंद घंटों में लगभग दो लाख मरीजों के उपचार एवं दवाओं का बंदोबस्त किया था। उस दौरान ही मुझे अपनी प्रतिष्ठा और कद का सही मायनों में पता चला जब समस्त दवा वितरकों ने मेरी एक आवाज पर बिना किसी शुल्क के दवाओं की अनवरत व्यवस्था की थी। इस तरह की आपदाओं में समय अति महत्वपूर्ण होता है। समय बीतने के बाद किये गये इंतजाम किसी मतलब के नहीं होते। हमें समय पर सारे बंदोबस्त करने थे और हम उसमें बहुत हद तक सफल भी हुए थे। इन दिनों उत्तराखंड में जो लचर रवैया देखने को मिला वो अति दुखद है।

प्रश्न- आपने अपने करियर के दौरान इस पेशे में किस तरह के बदलावों को महसूस किया है?
उत्तर- मैं सन् 1959 से इस क्षेत्र में हूँ। तब इक्का-दुक्का ही चिकित्सक हुआ करते थे। इसलिये चिकित्सक ही सर्वेसर्वा थे, उन्हीं की प्रधानता थी। आज रोगी की प्रधानता है, उसके पास कई विकल्प हैं और वो जागरुक भी है। पिछले 50 वर्षों में विज्ञान ने इतनी प्रगति की कि रोग के निदान के लिये मशीनें एवं परीक्षण उपलब्ध हो गये हैं इससे रोग का निश्चित निदान संभव हो सका है। पहले सबकुछ चिकित्सक की योग्यता व निर्णयक्षमता पर ही निर्भर था।

प्रश्न- आज आपके पढ़ाये हुए विद्यार्थी कई बड़े-बड़े पदों पर कार्यरत हैं ये सब देख आपको कैसा लगता है?
उत्तर- अच्छा लगता है, गर्व की अनुभूति होती है। वे सभी आज भी पहले की ही तरह पूरा सम्मान देते हैं। अपने विद्यार्थियों के द्वारा जब आपके द्वारा प्रदत्त कौशल को आगे बढ़ते देखते हैं तो प्रसन्नता होती है।

प्रश्न- आज इस उम्र में भी आप कितने घंटे काम करते हैं?
उत्तर- (हंसते हुए) उम्र दो प्रकार की होती है पहली अंकों की उम्र और दूसरी आपकी शारीरिक और मानसिक क्षमता। मेरे मस्तिष्क और शरीर की कार्यक्षमता जस की तस बनी हुई है और आज भी मैं पहले की तरह 13 से 14 घंटे काम करता हूँ। इसलिये मेरी उम्र लिखी भले हिन्दी में 82 साल जाती है, पर इसे ऊर्दू की तर्ज पे 28 पढ़ा जाय।

प्रश्न- आज की पीढ़ी के डॉक्टर्स के लिये आप क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर- इस व्यवसाय को चुनने के पहले अपनी मनःस्थिति को तैयार कर लेना चाहिये कि इस व्यवसाय में प्रवेश करने के बाद समय अपना नहीं रहता। मरीजों की परवाह किसी भी दूसरी चीज़ से बढ़कर है। पैसा और प्रतिष्ठा सहज प्राप्त होते हैं पर इसका ध्येय कभी नहीं होना चाहिये।

प्रश्न- अगर आपको अगला जन्म मिले तो आप क्या बनना चाहेंगे?
उत्तर- ये एक काल्पनिक बात है मैं इसपे विश्वास नहीं करता। हमें एक जीवन मिलता है और उसमें ही सबकुछ करना है। अगर अगला जन्म हुआ भी तो मुझे पहचानेगा कौन? (मुस्कुराते हुए)

प्रश्न- अंत में आप डॉक्टर्स डे किस तरह सेलीब्रेट करते हैँ?
उत्तर- (हल्की मुस्कुराहट के साथ) भला हम क्यों डॉक्टर्स डे सेलीब्रेट करें। ये दिन तो लोगों को डॉक्टर्स के सम्मान में सेलीब्रेट करना चाहिये और रही हमारी बात तो हम तो रोज की तरह अपना काम करते हुए ही इस दिन को बितायेंगे।

(ये साक्षात्कार प्रमुख हिन्दी दैनिक "पीपुल्स समाचार" के आज के अंक में डॉक्टर्स स्पेशल पूरक अंक पर प्रकाशित हुआ है) 

4 comments:

  1. बहुत बढ़िया रहा यह साक्षात्‍कार। इस हेतु बधाई आपको।

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  2. डॉ. साहब ने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर टाल दिया।

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  3. बहुत बढ़िया साक्षात्‍कार.....!!

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  4. अब ऐसे समर्पित डाक्टर कम ही होते हैं जिनका ध्येय सिर्फ पैसा नहीं है....

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